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भुजंगासन कैसे करें? इसके फायदे? | Bhujangasana Steps and Benefits in Hindi | How to do Bhujangasana

हेलो दोस्तों आप सभी का स्वागत है | आज के इस आर्टिकल "भुजंगासन कैसे करें? इसके फायदे? | Bhujangasana Steps and Benefits in Hindi | How to do Bhujangasana" में हम आपसे Bhujangasana से संबंधित कुछ चीजें शेयर करने वाले हैं | जैसे कि Bhujangasana कैसे करते हैं? Bhujangasana क्या है? Bhujangasana से होने वाले लाभ और इसमें बरती जाने वाली सावधानी क्या-क्या है | तो चलिए इस आर्टिकल के माध्यम से सब कुछ जानते हैं |


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Bhujangasana Benifits and Steps


Bhujangasana क्या है? - What is Bhujangasana

इस आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए भुजंग अर्थात सांप जैसी बन जाती है इसलिए इसको भुजंगासन या सर्पासन कहा जाता है |
ध्यान कंठ में श्वास ऊपर उठते वक्त पूरक(श्वास भीतर लेना) और निचे की और जाते समय रेचक(श्वास बाहर छोड़ना) |

भुजंगासन करने की विधि (Bhujangasana yoga karne ki vidhi) - How to do Bhujangasana yoga

  1. भूमि पर एक कंबल बिछा लीजिए और उस पर पेट के बल उल्टे होकर लेट जाइए |
  2. दोनों पैर और पंजे आपस में मिला कर रखिए |
  3. पैरों के अंगूठे को पीछे की और कीजिए |
  4. दोनों हाथ सिर की तरफ लंबे कर दीजिए |
  5. पैरों के अंगूठे, नाभि, छाती, ललाट और हाथ की हथेलियों भूमि पर एक सीध में रखें |
  6. अब दोनों हथेलियों को कमर के पास ले जाएं |
  7. सिर और कमर ऊपर उठाकर जितना हो सके उतना पीछे की ओर मोड़ लीजिए |
  8. नाभि भूमि से लगी रहे |
  9. पूरे शरीर का वजन हाथ के पंजे पर आएगा |
  10. शरीर की स्थिति कमान जैसी बनेंगी |
  11. मेरुदंड के आखिरी भाग पर दबाव केंद्रित होगा |
  12. चित्त वृत्ति को कंठ में और दृष्टि को आकाश की तरफ स्थिर करें |
  13. 20 सेकंड तक यह स्थिति रखें |
  14. बाद में धीरे-धीरे सिर को नीचे की ओर ले जाइए |
  15. छाती भूमि पर रखें और सिर को भी भूमि से लगने दें |
  16. आसन सिद्ध हो जाने के बाद आसन करते समय श्वास भरके कुंभक करें |
  17. आसन छोड़ते समय मूल स्थिति में आने के बाद श्वास को खूब धीरे-धीरे छोड़िए |
  18. हर रोज एक साथ 8 से 10 बार यह आसन(Bhujangasana) किया जा सकता है |
  19. यह एक प्रकृति के द्वारा दिया हुआ एक अद्भुत आसन है आप भी इसका लाभ उठाइये | चलिए अब Bhujangasana से होने वाले लाभ देखते है |
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Bhujangasana Steps in Hindi


भुजंगासन के लाभ (Bhujangasana yoga ke fayde) - Benefits of Bhujangasana yoga in Hindi

  • घेरण्ड संहिता में इसका लाभ बताते हुए कहा गया है की: Bhujangasana से जठर अग्नि प्रदीप्त होती है, सर्व रोगो का नाश होता है और कुंडलिनी जागरण होता है |
  • मेरुदंड के तमाम मन को तथा गर्दन के आसपास वाले स्नायुओ को अधिक शुद्ध रक्त मिलता है |
  • फलतः नाड़ीतंत्र सचेत बनता है, चिरंजीवी, शक्तिमान और सुदृढ़ बनता है | विशेष कर, मस्तिष्क से निकलने वाले ज्ञानतंतु बलवान बनते है |
  • पीठ की हड्डिया में रहने वाली तमाम खराबियाँ दूर होती हैं |
  • पेट के स्नायु में खिंचाव आने से वहां के अंगो को शक्ति मिलती मिलती हैं |
  • उदरगुहा में दबाव बढ़ने से कब्ज दूर होता हैं |
  • छाती और पेट का विकास होता है तथा उनके रोग मिट जाते हैं |
  • गर्भाशय एवं बौनाशय अच्छे बनते है | फलतः मासिक स्त्राव कास्ट रहित होता हैं |
  • मासिक धर्म संबंधी समस्त शिकायतें दूर होती हैं |
  • अति श्रम करने के कारण लगने वाली थकन दूर होती हैं |
  • भोजन के बाद होने वाला वायु का दर्द मतलब गैस का दर्द मिट जाता है |
  • शरीर में स्फूर्ति आती हैं |
  • कफ पित्त वालों के लिए यह आसान लाभदायी है |
  • Bhujangasana करने से हृदय मजबूत बनता है |
  • मधुप्रमेय और उदर के रोगो से मुक्ति मिलती है |
  • प्रदर, अति मासिक स्त्राव तथा अलप मासिक स्त्राव जैसे रोग दूर होते हैं |
  • Bhujangasana से मेरुदंड लचीला बनता है |
  • पीठ में इड़ा और पिंगला नाड़ियों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है |
  • कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत करने के लिए यह आसन Bhujangasana सहायक है |
  • आमाशय की मांसपेशियों का अच्छा विकास होता है |
  • थकन के कारण पीठ में पीड़ा होती हो तो सिर्फ एक बार ही यह आसन Bhujangasana करने से पीड़ा दूर होती है |
  • मेरुदंड की कोई हड्डी स्थान भंग हो गयी हो तो Bhujangasana करने से यथास्थान में वापस आ जाती है | 
Final words - So you can try this Bhujangasana and take benefits by this health article "भुजंगासन कैसे करें? इसके फायदे? | Bhujangasana Steps and Benefits in Hindi | How to do Bhujangasana" thank you...

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