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नई कहानी कड़वा सच New story bitter truth

नई कहानी कड़वा सच New story bitter truth


मंगला सब्ज़ी ख़रीदकर अंदर आकर बड़बड़ा रही थी। पति ने पूछा- 
'क्या हुआ? क्यों इतना शोर मचा रही हो?
'देखो न! सौ रुपये में भी एक दिन की पूरी सब्जि़यां नहीं आतीं। सत्यानाश हो इस महंगाई का।
सब्जी की टोकरी लगभग पटकते हुए 'इतनी महंगाई तो अभी तक कभी न देखी। 
'जब देश में विकास होगा तो महंगाई बढ़ेगी ही।
'काहे का विकास, सब काग़ज़ी बातें हैं।




this post you learn new story bitter truth (कड़वा सच)





'किसानों की कर्ज़माफ़ी, गरीबों के लिए सस्ता राशन, लड़कियों की पढ़ाई मुफ़्त, उनके लिए विशेष योजना, ऐसी कितनी ही सहूलियतें दी हैं सरकार ने। 
'हां क्यों नहीं? मध्यमवर्ग के मुंह से निवाला छीनकर गरीबों का उद्धार। सब दिखावा है। 
'कैसे कह सकती हो?
'पिछले ही हफ़्ते दुलारी पूरे चार घंटे लाइन में लगी थी तब कहीं जाकर राशन मिला। वो भी घुने गेहूं और चावल।
'सरकार इन्हीं के लिए तो उज्ज्वला योजना लाई है ताकि इनका जीवन स्तर सुधार सके।
'सिर्फ़ योजना से कुछ नहीं होता। क्रियान्वयन और देखना ज़रूरी है कि योजना सुचारू रूप से चल भी रही है या नहीं।
पति ने खीजते हुए कहा 'तुम्हें तो हर चीज़ में कमियां निकालने की आदत है। जो मिल रहा है, उसे भी तो देखो।
'अरे दुलारी, कितनी देर कर दी आज। कब से राह देख रही हूं।
'दीदी वो बच्चों के लिए खाना...
'खाना तो रोज़ बनाती है आज नया क्या है?
पति की ओर देखते हुए,'और हां वो तुझे सरकार की तरफ़ से सस्ते में रसोई गैस भी तो मिली है। अब तो आराम ही आराम है।
'काहे का आराम, गैस ख़त्म हो गई चूल्हे पर खाना बनाना पड़ा।
'तो गैस भरवा लाती।
'दीदी अब हज़ार रुपए कहां से लाऊं? 
पति मुस्कुरा उठे - 'तुम दोनों को भी हर सुविधा घर बैठे चाहिए, वो भी पूरी तरह मुफ़्त। देश तुम जैसे हर शख़्स से पूछे, तुमने क्या किया मेरे लिए, तो देखें क्या जवाब देते हो। कौन-सा देश परफेक्ट होता है। उसे ऐसा बनाना पड़ता है।'  
गला सब्ज़ी ख़रीदकर अंदर आकर बड़बड़ा रही थी। पति ने पूछा- 
'क्या हुआ? क्यों इतना शोर मचा रही हो?
'देखो न! सौ रुपये में भी एक दिन की पूरी सब्जि़यां नहीं आतीं। सत्यानाश हो इस महंगाई का। 
सब्जी की टोकरी लगभग पटकते हुए 'इतनी महंगाई तो अभी तक कभी न देखी। 
'जब देश में विकास होगा तो महंगाई बढ़ेगी ही।
'काहे का विकास, सब काग़ज़ी बातें हैं।
'किसानों की कर्ज़माफ़ी, गरीबों के लिए सस्ता राशन, लड़कियों की पढ़ाई मुफ़्त, उनके लिए विशेष योजना, ऐसी कितनी ही सहूलियतें दी हैं सरकार ने। 
'हां क्यों नहीं? मध्यमवर्ग के मुंह से निवाला छीनकर गरीबों का उद्धार। सब दिखावा है।
'कैसे कह सकती हो?
'पिछले ही हफ़्ते दुलारी पूरे चार घंटे लाइन में लगी थी तब कहीं जाकर राशन मिला। वो भी घुने गेहूं और चावल।
'सरकार इन्हीं के लिए तो उज्ज्वला योजना लाई है ताकि इनका जीवन स्तर सुधार सके।
'सिर्फ़ योजना से कुछ नहीं होता। क्रियान्वयन और देखना ज़रूरी है कि योजना सुचारू रूप से चल भी रही है या नहीं।
पति ने खीजते हुए कहा 'तुम्हें तो हर चीज़ में कमियां निकालने की आदत है। जो मिल रहा है, उसे भी तो देखो।
'अरे दुलारी, कितनी देर कर दी आज। कब से राह देख रही हूं।
'दीदी वो बच्चों के लिए खाना...
'खाना तो रोज़ बनाती है आज नया क्या है?
पति की ओर देखते हुए,'और हां वो तुझे सरकार की तरफ़ से सस्ते में रसोई गैस भी तो मिली है। अब तो आराम ही आराम है।
'काहे का आराम, गैस ख़त्म हो गई चूल्हे पर खाना बनाना पड़ा।
'तो गैस भरवा लाती।
'दीदी अब हज़ार रुपए कहां से लाऊं?
पति मुस्कुरा उठे - 'तुम दोनों को भी हर सुविधा घर बैठे चाहिए, वो भी पूरी तरह मुफ़्त। देश तुम जैसे हर शख़्स से पूछे, तुमने क्या किया मेरे लिए, तो देखें क्या जवाब देते हो। कौन-सा देश परफेक्ट होता है। उसे ऐसा बनाना पड़ता है।'  

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