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हार्ड वर्क नहीं स्मार्ट वर्क आपको बनाएगा ज्यादा प्रोडक्टिव Hard work not smart work will make you more productive

हार्ड वर्क नहीं स्मार्ट वर्क आपको बनाएगा ज्यादा प्रोडक्टिव  Hard work no smart work will make you more productive






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वर्क के समय और प्रॉडक्टिविटी को देखे, तों हर 50 घंटे बाद प्रॉडक्टिविटी कम हो जाती है, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में यह बात सामने आई है। खुद को एक्स्ट्रा समय देने से ज्यादा जरूरी है कि हम अपने एक्टिव टाइम में अधिक से अधिक काम कर पाएं। रिसर्च यह बताती हैं कि एक हफ्ते में 50 घंटे काम कर लेने के बाद हमारा आउटपुट कम हो जाता है और हम असरदार तरीके से काम नहीं कर सकते। जॉब में हो या बिजनेस में, कई बार हमारे पास काम खत्म करने के लिए पूरा समय भी नहीं होता। इससे हमें हमेशा महसूस होता रहता है कि हम पीछे रह गए हैं। यह विचार हमारी प्रॉडक्टिविटी और हेल्थ, दोनों के लिए ही अच्छा नहीं होता। इसीलिए यह बहुत जरूरी है कि हम हार्ड वर्क की जगह स्मार्ट वर्क के तरीके आजमाएं। 
रिजल्ट पर ध्यान दें, टाइम न देखें जब बात प्रॉडक्टिविटी की आती है, तो हम अक्सर इस बात पर फोकस करते हैं कि किसी काम को पूरा होने में कितना समय लगता है। मसलन, यदि आपको एक हजार शब्दों का ब्लॉग लिखने में 4 घंटे लगते हैं, तो आपको महसूस होगा कि यह काफी लंबा समय है। अगर आप इस काम को 200 शब्दों के पांच हिस्सों में बांट लेंगे, तो आप पाएंगे कि आप उतने ही टाइमफ्रेम में न केवल एक हजार शब्द लिख पाएंगे, बल्कि हैडिंग लिखने से लेकर स्पैलचैक और इमेज एड करने जैसे काम भी कर पाएंगे। इस तरह आप आगे की बेहतर प्लानिंग भी कर पाएंगे। 
कम्युनिकेशन को मजबूत बनाएं आप पेशे से चाहें फ्रीलांसर हों, आंत्रप्रेन्योर हों या एम्प्लॉई, आपको दूसरों के साथ काम करने की जरूरत कभी न कभी जरूर महसूस होती है। ऐसे में, जरूरी है कि आप अपनी कम्युनिकेशन और कबोरेशन स्किल्स को डेवलप करें। ऐसा करते हुुए आप गलत कम्युनिकेशन और गलतफहमी की वजह से किसी भी काम को दोबारा करने और दोगुना समय लगाने से खुद को बचा सकते हैं। इसके लिए अपनी एक्टिव लिसनिंग स्किल्स काे मजबूत बनाने के साथ आप कम्युनिकेशन के दौरान एक ही टॉपिक पर फोकस करने की आदत डालें। 

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