Ishwar Chandra Vidyasagar heart touching Motivational story

Hello guys, आज के आर्टिकल "Ishwar Chandra Vidyasagar heart touching Motivational story" में से आपको जरूर कुछ सिखने मिलेगा | तो चलिए अब आपको हम ईश्वर चंद विद्यासागर के जीवन की एक घटना बताते है |
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Ishwar Chandra Vidyasagar heart touching Motivational story

Ishwar Chandra Vidyasagar heart touching Motivational story

एक बालक हमेशा की तरह विद्यालय पढ़ने जाता था | घर में उसकी माता थी | मां अपने बेटे पर प्राण निछावर किए रहती थी | उसकी हर मांग पूरी करने में आनंद का अनुभव करती है | उत्तर भी पढ़ने लिखने में बड़ा परिश्रमी था | एक दिन दरवाजे पर किसी ने माई हो माई पुकारते हुए आवाज़ लगाई | तो पुस्तक पकड़े हुए द्वार पर गया | देखा कि एक फटेहाल बूढ़ी औरत कांपते हुए हाथ फैलाए खड़ी थी | उसने कहा बेटा, कुछ भी दे दो अर्थात भीख |

बूढ़ी औरत के मुंह से बेटा सुनकर वहां भावुक हो गया और मां से आकर कहने लगा | मां, एक बेचारी गरीब बूढ़ी औरत मुझे बेटा कह कर कुछ मांग रही है | उस समय घर में कुछ खाने की चीज थी नहीं, इसलिए मां ने कहा, बेटा रोटी दाल तो कुछ बचा नहीं है, चाहे तो चावल दे दो | पर बालक ने हठ करते हुए कहा -चावल से क्या होगा ? तुम जो अपने हाथ में सोने का कंगन पहने हो वही दे दो ना | उस बेचारी को मैं जब बड़ा होकर कमा लूंगा तो तुम्हारे लिए दो कंगन बनवा दूंगा |

उन्होंने बालक का मन रखने के लिए सच में ही सोने का अपना वहां कंगन कलाई से उतारा और कहा, लो दे देना | बालक खुशी-खुशी वह कंगन गरीब को दे आया, गरीब को तो मानो खजाना ही मिल गया | कंगन बेचकर उसने परिवार के बच्चों के लिए अनाज कपड़े आदि ले लिया | उसका पति अंधा था | उधर वह बालक पढ़ लिख कर बड़ा विद्वान हुआ ,काफी नाम कमाया |

बहुत दिनों बाद बड़ा होकर वहां अपनी मां से बोला अपने हाथ का नाप दे दो मैं कंगन बनवा दूंगा | उसे बचपन का अपना वचन याद आ गया था | पर माता ने कहा, उसकी चिंता छोड़ मैं इतनी बड़ी हो गई हूं ki मुझे कंगन शोभा नहीं देते | हां, कोलकाता के तमाम गरीब बालक विद्यालय और चिकित्सा के लिए मारे मारे फिरते हैं | उनके लिए तू एक विद्यालय और एक चिकित्सालय खुलवा दे, जहां वे निशुल्क पढ़ाई और चिकित्सा की व्यवस्था ho | यही बालक बड़ा होकर ईश्वर चंद्र विद्यासागर नाम से प्रसिद्ध हुआ |

Ishwar Chandra Vidyasagar heart touching Motivational story in English.

One child used to go to school, as usual, there was his mother in the house. The mother used to live a life on her son, she experienced joy in fulfilling her every demand. The answer was also a hard worker in writing. One day someone was mauled at the door. When I called my voice, I went to the gate holding the book in Balaghat and saw that a scared old lady was trembling with trembling hands. He said, Son, give anything, ie begging.

Upon hearing the son of an old lady, she became emotional and came to her mother and said, Mother, a poor old lady has been demanding something by saying, my son. At that time there was nothing to eat in the house, so the mother said, the son is not left to eat the pulse, whether it is rice. But the boy stubbornly said, 'What will happen to Chaval?' Do not give the gold bracelet you wear in your hand. When I grow up, I will make two bracelets for you.

To keep a child's heart, he really brought his bracelet from the wrist of gold and said, give it to you. The boy happily brought the bracelet to the poor, the poor got the treasure. By selling bracelets, he took grain cloth etc. for the children of the family. Her husband was blind He read a little child there, became a big scholar, earned a lot of names.

After a long time growing up and speak to your mother and give me a measure of your hand I will make a bracelet. He had forgotten his own word of childhood. But mother said I have grown so big that I do not wear bracelets. Yes, all poor children in Kolkata are killed for the school and for medical reasons. For them, you open a school and a hospital where they get free education and medical care. This boy grew up and became famous as Ishwar Chandra Vidyasagar.

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